संसाधन पर्याप्तता नियोजन (RAP) का अवलोकन
संसाधन पर्याप्तता योजना (RAP) एक राष्ट्रीय (फ्रेमवर्क) है जिसका उद्देश्य भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विश्वसनीय, किफायती और सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है। विद्युत (संशोधन) नियम, 2022 के
नियम 16 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय (MoP) ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के परामर्श से जून 2023 में भारत के लिए संसाधन पर्याप्तता दिशानिर्देश जारी
किए। ये दिशानिर्देश देश भर में पर्याप्त विद्युत संसाधनों की अग्रिम योजना और खरीद के लिए एक समान दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। इसके समानांतर, विनियामक मंच (FoR) ने राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (UT) द्वारा
अपनाने को सुगम बनाने के लिए संसाधन पर्याप्तता ढांचे के लिए मॉडल विनियम जारी किए। संसाधन पर्याप्तता से तात्पर्य, पर्याप्त उत्पादन क्षमता, ऊर्जा भंडारण और अन्य स्थिति के अनुसार ढलने वाले
संसाधनों की उपलब्धता से है, ताकि बिजली की मांग को हर समय, यहां तक कि चरम मांग अवधि के दौरान भी, किफायती तरीके से विश्वसनीय रूप से पूरा किया जा सके। RAP ढांचा संसाधनों का समयबद्ध नियोजन और
खरीद को सक्षम बनाता है ताकि भविष्य में मांग में होने वाली वृद्धि का पहले से ही समाधान किया जा सके,
जिससे विद्युत की कमी का जोखिम कम हो और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले।
राज्य संसाधन पर्याप्तता नियोजन (SRAP)
राज्य संसाधन पर्याप्तता नियोजन (SRAP) ढांचे के तहत, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को अपनी भविष्य की बिजली मांग का आकलन करना और समन्वित एवं व्यवस्थित तरीके से उपयुक्त संसाधनों का नियोजन करना
आवश्यक है। SRAP प्रक्रिया उत्पादन, पारेषण और वितरण अवसंरचना के लिए दीर्घकालिक योजना में सहायता करती है और ऊर्जा भंडारण तथा अन्य लचीले विकल्पों सहित पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के
अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देती है। यह ढांचा ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाता है, ग्रिड की विश्वसनीयता में सुधार करता है और एक सतत विद्युत क्षेत्र की ओर परिवर्तन का समर्थन करता है।
संसाधन पर्याप्तता अध्ययन रिपोर्ट
SRAP कार्यान्वयन की स्थिति
28 राज्यों में से 16 राज्यों ने अपने-अपने राज्य विद्युत विनियामक आयोगों (SERC) के माध्यम से अपने अंतिम राज्य संसाधन पर्याप्तता (SRA) ढांचे अधिसूचित कर दिए हैं, जबकि 3 राज्यों ने हितधारक परामर्श हेतु मसौदा
ढांचे जारी किए हैं। शेष राज्य अपने SRA ढांचों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरु करने में हैं। सभी संघ राज्य क्षेत्रों ने अपने-अपने संयुक्त विद्युत नियामक आयोगों (JERC) के माध्यम से अपने संसाधन पर्याप्तता नियोजन दस्तावेज
प्रकाशित कर दिए हैं।