Pension Adalat in Ministry of New & Renewable Energy on 23rd August, 2019 from 10.30 AM to 4.00 PM in Conference Room No. 002 (Ground Floor), Block-14, CGO Complex Lodhi Road, New Delhi - 110003

परिचय

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नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) नवीन और अक्षय ऊर्जा से संबंधित सभी मामलों के लिए भारत सरकार का नोडल मंत्रालय है। मंत्रालय का मुख्‍य उद्देश्‍य देश की ऊर्जा आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए नवीन और अक्षय ऊर्जा का विकास तथा स्‍थापना करना है।

केस और मंत्रालय का सृजन :

1.      1981 में अतिरिक्‍त ऊर्जा स्रोत आयोग (केस)

2.       1982 में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत विभाग (डीएनईएस)

3.       1992 में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय (एमएनईएस)

4.       2006 में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय (एमएनईएस) का नाम बदल कर नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय किया गया

 नवीन और अक्षय ऊर्जा की भूमिका को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बढ़ती चिंता के साथ हाल के दिनों में अत्‍यधिक महत्‍व दिया गया है। ऊर्जा 'आत्‍मनिर्भरता' को 1970 के दौरान घटे दो तेल आघातों को ध्‍यान रखते हुए देश में नवीन और अक्षय ऊर्जा के लिए प्रमुख प्रेरक के रूप में पहचाना गया। तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि, इसकी आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितता और भुगतानों के संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव से मार्च 1981 में विज्ञान और प्रौद्योगिक विभाग में अतिरिक्‍त ऊर्जा स्रोत आयोग की स्‍थापना की गई। इस आयोग को नीति निर्धारण और उनके कार्यान्‍वयन, नवीन और अक्षय ऊर्जा के विकास हेतु कार्यक्रम बनाने के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ाने तथा समन्‍वय करने का दायित्‍व भी सौंपा गया। वर्ष 1982 में तत्‍कालीन ऊर्जा मंत्रालय में एक नए विभाग, अर्थात अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत विभाग (डीएनईएस) बनाया गया जिसमें केस को शामिल किया गया था, वर्ष 1992 में डीएनईएस को अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय बनाया गया। अक्‍तूबर 2006 में इसे नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय का नया नाम दिया गया।