Bio Energy

Overview

बायोमास

1. परिचय 

बायोमास के लाभों को देखते हुए, यह देश के लिए सदैव ही एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत रहा है। यह नवीकरणीय है, व्यापक रूप से उपलब्ध है, कार्बन-उदासीन है और ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रोजगार प्रदान करने की क्षमता रखता है। बायोमास दृढ़ ऊर्जा प्रदान करने में भी सक्षम है। देश में कुल प्राथमिक ऊर्जा उपयोग का लगभग 32% अभी भी बायोमास से प्राप्त किया जाता है और देश की 70% से अधिक जनसंख्या, अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी पर निर्भर है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने भारतीय संदर्भ में बायोमास ऊर्जा की क्षमता और भूमिका का आकलन किया है और इसलिए अधिकतम लाभ प्राप्त करने के उद्‌देश्य से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग हेतु कुशल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रमों की शुरुआत की है। बायोमास के कुशल उपयोग के लिए, चीनी मिलों में बैगास आधारित सहउत्पादन और बायोमास बिजली उत्पादन को बायोमास बिजली और सहउत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत लिया गया है।

ग्रिड बिजली उत्पादन के लिए देश के बायोमास संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने के लिए तकनीकों को बढ़ावा देने के मुख्य उद्देश्य के साथ बायोमास बिजली और सहउत्पादन कार्यक्रम लागू किया गया है। बिजली उत्पादन के लिए प्रयुक्त बायोमास सामग्रियों में बैगास (खोई), धान की भूसी, पुआल, कपास का डंठल, नारियल के छिलके, सोया की भूसी, तिलहन की खली, कॉफी का अपशिष्ट, जूट का अपशिष्ट, मूंगफली के छिलके, लकड़ी का बुरादा आदि सम्मिलित हैं। 

2. संभावित क्षमता

भारत में बायोमास की वर्तमान उपलब्धता प्रति वर्ष लगभग 500 मिलियन मीट्रिक टन अनुमानित है। मंत्रालय द्वारा प्रायोजित अध्ययनों में कृषि और वानिकी के अवशेषों को कवर करते हुए लगभग 120-150 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की अनुमानित अतिरिक्त जैवमात्रा उपलब्धता का आकलन किया गया है जो लगभग 18,000 एमडब्ल्यू की संभावित क्षमता है। इसके अलावा, चीनी मिलों द्वारा उत्पादित बैगास से बिजली उत्पादन के लिए तकनीकी और आर्थिक इष्टतम स्तर का सहउत्पादन अपनाए जाने की स्थिति में देश की 550 चीनी मिलों में बैगास आधारित सहउत्पादन के माध्यम से लगभग 7000 एमडब्ल्यू अतिरिक्त बिजली उत्पादित की जा सकती है।

3. तकनीक (प्रौद्योगिकी)

3.1 दहन

बायोमास को उपयोगी उत्पादों में बदलने की ताप-रासायनिक प्रक्रियाओं में दहन, गैसीकरण या पायरोलिसिस सम्मिलित हैं। दहन, सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला तरीका है। इसका लाभ यह है कि बॉयलर के सिवाय, प्रयोग की जाने वाली तकनीक कोयला आधारित तापीय संयंत्र के समान होती है। उपयोग किया जाने वाला चक्र पारंपरिक रैंकाइन चक्र होता है जिसमें बायोमास को जलाकर भाप उत्पन्न की जाती है और उत्पन्न भाप से एक टरबाइन चलाई जाती है। भाप टरबाइन का निकास या तो पूरी तरह से संघनित होकर बिजली उत्पादन कर सकता है, या किसी अन्य उपयोगी तापन गतिविधि के लिए आंशिक रूप से या पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता है। बाद वाले स्वरूप को सहउत्पादन कहा जाता है। भारत में, सहउत्पादन का तरीका उद्योगों में मुख्य रूप से प्रचलित है।

3.2  चीनी मिलों में सहउत्पादन

चीनी उद्योग परंपरागत रूप से एक ईंधन के रूप में बैगेज का उपयोग करते हुए सहउत्पादन का कार्य कर रहा है। उत्पादन प्रौद्योगिकी में प्रगति और उच्च तापमान और दबाव पर भाप के उपयोग के साथ, चीनी उद्योग अपनी स्वयं की आवश्यकताओं के लिए बिजली और भाप का उत्पादन कर सकता है। यह बैगास की उतनी ही मात्रा का उपयोग करके ग्रिड पर बिक्री के लिए पर्याप्त अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि भाप उत्पादन तापमान/दबाव 400°C/33 बार से 485°C/66 बार तक बढ़ा दिया जाता है, तो प्रत्येक टन गन्ना पेराई के सापेक्ष 80 केडब्ल्यूएच से अधिक अतिरिक्त बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। इष्टतम सहउत्पादन के माध्यम से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली की बिक्री करने से चीनी मिल को देश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के अलावा, अपनी व्यावहारिकता में सुधार करने में भी मदद मिलेगी। 

4. परिनियोजन (स्थापना) 

नब्बे के दशक के मध्य से मंत्रालय बायोमास बिजली/सह उत्पादन कार्यक्रम लागू कर रहा है। ग्रिड पर बिजली फीड करने के लिए देश में कुल 9806 एमडब्ल्यू क्षमता की 500 से अधिक बायोमास बिजली और बैगास सहउत्पादन परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों ने बैगास सहउत्पादन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी अग्रणी स्थिति बनाई है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु राज्य, बायोमास बिजली परियोजनाओं में अग्रणी हैं।   

5. केन्द्रीय वित्तीय सहायता और मौद्रिक प्रोत्साहन  

5.1 निजी/संयुक्त/सहकारी/सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों द्वारा बायोमास बिजली परियोजना और बैगास सहउत्पादन परियोजनाओं के लिए सीएफए।

परियोजना का प्रकार

पूंजीगत सब्सिडी

बायोमास बैगास सहउत्पादन परियोजनाएं

रु.25 लाख एक्स (सी * एमडब्ल्यू)

बायोमास (गैर- बैगास) सहउत्पादन परियोजनाएं

 

रु. 50 लाख एक्स (सी ** एमडब्ल्यू)

** संस्थापित क्षमता *अधिशेष निर्यात योग्य क्षमता

नोट: सीएफए में परिवर्तन हो सकता है।

6. वर्तमान स्थिति

बायोमास बिजली और सहउत्पादन क्षेत्र में 9806 एमडब्ल्यू की कुल क्षमता स्थापित की गई है।

ग्रिड से कनेक्टेड – 9131 एमडब्ल्यू

ऑफ-ग्रिड – 675 एमडब्ल्यू

राज्यवार विभाजन नीचे दिया गया है: -

एसएनए से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार (31.07.2019 तक) पिछले पांच वर्षों के दौरान ग्रिड कनेक्टेड बायोमास बिजली और बैगास सहउत्पादन परियोजनाओं की संस्थापित क्षमता की राज्यवार/वर्षवार सूची

राज्य

31.03.2016 तक

(एमडब्ल्यू में)

2016-17

(एमडब्ल्यू में)

2017-18

(एमडब्ल्यू में)

2018-19

(एमडब्ल्यू में)

2019-20

(एमडब्ल्यू में)

 

क्रमसंचयी स्थापित क्षमता

(एमडब्ल्यू में)

31.07.2019 तक के अनुसार

आंध्र प्रदेश

378.2

0

0

0

0

 

378.2

बिहार

104

9

0

0

0

 

113

छत्तीसगढ़

228

0

0

0

0

 

228

गुजरात

65.3

0

0

0

0

 

65.3

हरियाणा

96.4

0

25

0

0

 

121.4

कर्नाटक

1402

50

301.6

30

28

 

1811.6

मध्य प्रदेश

93

0

0

0

0

 

93

महाराष्ट्र

1967

98

105

329.7

0

 

2499.7

तेलंगाना

158.1

0

0

0

0

 

158.1

पंजाब

179

0

15

 

0

 

194

राजस्थान

114.35

4.95

0

 

0

 

119.3

तमिलनाडु

878

0

48

 

43

0

 

969

उत्तराखंड

73

0

0

 

0

0

 

73

उत्तर प्रदेश

1933

0

24.5

 

0

0

 

1957.5

पश्चिम बंगाल

300

0

0

 

0

0

 

300

ओडिशा

50.4

0

0

 

0

0

 

50.4

योग

8019.75

161.95

519.1

 

402.7

28

 

9131


एसएनए से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार (31.07.2019 तक) पिछले पांच वर्षों के दौरान बायोमास (गैर-बैगास) सहउत्पादन परियोजनाओं की संस्थापित क्षमता की राज्यवार/वर्षवार सूची

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम

31.03.2014 तक

(एमडब्ल्यू में)

2014-15

(एमडब्ल्यू में)

2015-16

(एमडब्ल्यू में)

2016-17

(एमडब्ल्यू में)

2017-18

(एमडब्ल्यू में)

2018-19

(एमडब्ल्यू में)

संचयी संस्थापित क्षमता (31.07.2019 तक)

आंध्र प्रदेश

75.42

3.17

20.39

-

-

-

98.98

छत्तीसगढ़

2.50

-

-

-

-

-

2.50

हरियाणा

35.91

21.65

25.5

1.20

-

-

84.26

हिमाचल प्रदेश

7.20

-

-

-

-

-

7.20

केरल

0.72

-

-

-

-

-

0.72

कर्नाटक

15.20

 

-

-

-

-

15.20

मध्य प्रदेश

12.35

-

-

-

-

-

12.35

महाराष्ट्र

16.40

 

-

-

-

-

16.40

मेघालय

13.80

-

-

-

-

-

13.80

ओडिशा

2.94

5.28

0.6

-

-

-

8.82

पंजाब

110.65

6.45

-

1

5

-

123.10

बिहार

8.20

 

-

-

-

-

8.20

राजस्थान

2.00

-

-

-

-

-

2.00

झारखंड

1.20

3.10

-

-

-

-

4.30

उत्तर प्रदेश

150.86

5.40

1.75

-

-

-

158.01

उत्तराखंड

42.50

5.00

10

-

-

-

57.50

पश्चिम बंगाल

17.42

2.50

-

-

-

-

19.92

तमिलनाडु

16.55

7.50

-

-

4.5

-

28.55

तेलंगाना

-

-

1

-

-

-

1

गुजरात

-

-

-

-

-

12

12

योग

531.82

60.05

59.24

2.2

9.5

12

674.81

बायोगैस    

संक्षिप्त परिचय: जैव-अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ/अपशिष्ट जैसे कि पशुओं का गोबर, खेतों से बायोमास, बगीचों, रसोई, उद्योग, मुर्गी की बीट, मल-मूत्र और पालिका अपशिष्ट को बायोगैस संयंत्र में एक वैज्ञानिक प्रक्रिया जिसे अवायवीय पाचन (ए.डी.) कहा जाता है में उपयोग करके बायोगैस का उत्पादन किया जाता है। बायोगैस संयंत्र डिजाइन कई कारकों पर निर्भर करता है और संसाधित किए जाने वाले फीड स्टॉक का सर्वाधिक महत्व है। बायोगैस कृषि अपशिष्ट, पशुओं का गोबर, मुर्गी की बीट, नगरपालिका अपशिष्ट, पौध सामग्री, सीवेज, हरित अपशिष्ट या भोजन/रसोई का अपशिष्ट आदि कच्चे माल से, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैव अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ के अपघटन/विघटन द्वारा निर्मित गैसों (मुख्य रूप से मीथेन (CH4) और कार्बन डाई-ऑक्साइड (CO2) और गौण मात्रा में हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S), नमी) का मिश्रण होती है। बायोगैस का कैलोरी मान लगभग 5000 किलोकैलोरी प्रति घन मीटर (मी3) होता है। बायोगैस संयंत्रों से उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होने वाला पाचित घोल कृषि में उपयोग के लिए पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक खाद का एक अच्छा स्रोत होता है। इससे न केवल फसल की पैदावार में सुधार करने में सहायता मिलती है बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य भी ठीक बना रहता है।

पशुओं की 512.06 मिलियन की संख्या, जिसमें लगभग 300 मिलियन (299.98 मिलियन) गोजातीय (मवेशी, भैंस, मिथुन और याक सम्मिलित) हैं, को देखते हुए बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की पर्याप्त संभावित क्षमता उपलब्ध है। पशुधन क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसमें वृद्धि जारी रहेगी। अपने प्रत्यक्ष और परोक्ष लाभों के साथ बायोगैस प्रौद्योगिकी का प्रसार, भारतीय किसानों के लिए एक वरदान है।

2. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ऑफ-ग्रिड/वितरित और विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के अंतर्गत  केंद्रीय क्षेत्र की 2 योजनाएं लागू करके बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाने को प्रोत्साहित करता है। ये दो जारी योजनाएं निम्न हैं:

    i.      1 घन मीटर से 25 घन मीटर प्रतिदिन तक आकार वाले बायोगैस संयंत्र के लिए नवीन राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद कार्यक्रम (एनएनबीओएमपी)।

    ii.     3 केडब्ल्यू से 250 केडब्ल्यू तक की सीमा में बायोगैस से संगत बिजली उत्पादन क्षमता या तापीय ऊर्जा/शीतलन (कूलिंग) अनुप्रयोगों के लिए अशोधित बायोगैस के लिए 30 मी3 से 2500 मी3 प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए बायोगैस बिजली उत्पादन (ऑफ-ग्रिड) और तापीय ऊर्जा अनुप्रयोग कार्यक्रम (बीपीजीटीपी)

 

बायोगैस में लगभग 55-65% मीथेन, 35-44% कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों जैसे कि हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रोजन और अमोनिया की कुछ मात्राएं होती हैं। बायोगैस, अपने कच्चे रूप में, अर्थात शोधित किए बिना, एलपीजी की तरह खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन, प्रकाश, चालन शक्ति और बिजली उत्पादन आदि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे डीजल इंजनों में उपयोग करते हुए 80% तक डीजल के स्थान पर इसे उपयोग किया जा सकता है और 100% बायोगैस इंजन का उपयोग करके डीजल को 100% प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा, बायोगैस को शोधित किया जा सकता है और 98% शुद्ध मीथेन सामग्री तक उन्नत बनाया जा सकता है, जिससे यह परिवहन हेतु स्वच्छ ईंधन के रूप में या 250 बार या उससे अधिक के उच्च दबाव पर सिलेंडर में भरे जाने के लिए उपयोग की जा सकती है जो कि संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) कहलाती है।

 

3. शुरुआत में बायोगैस संयंत्र मवेशियों के गोबर को सड़ाने के लिए विकसित किए गए थे। हालांकि, समय के साथ विभिन्न प्रकार के बायोमास पदार्थों और जैविक अपशिष्ट के जैव-मीथेनेशन के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की गई। अब 0.5 मी3 से 1000 मी3 इकाई आकार वाले या उससे बड़े वाले बायोगैस संयंत्र के डिजाइन उपलब्ध हैं और परिवार/घरेलू, छोटे किसानों, डेयरी किसानों के लिए और सामुदायिक, संस्थागत और औद्योगिक/वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए ज्यादा बड़े आकार का बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर उनमें से कई को एक साथ स्थापित किया जा सकता है। औद्योगिक और नगरपालिका अपशिष्ट आधारित बायोगैस संयंत्रों का इकाई आकार 15000 मी3 से 20000 मी3 प्रतिदिन बायोगैस उत्पादन तक हो सकता है।

 4. डिजाइन और अनुमोदित मॉडल:

बायोगैस संयंत्रों के विभिन्न डिजाइनों को एमएनआरई ने मंजूरी दी है और वे क्षेत्र में उपयुक्त सिद्ध हुए हैं। बायोगैस संयंत्र, सहायक सामानों और उपकरणों के लिए भारतीय मानक भी एमएनआरई और बीआईएस द्वारा निर्दिष्ट किए गए हैं। यह प्रक्रिया अनवरत है। एनएनबीओएमपी के अंतर्गत बायोगैस संयंत्रों के 4 प्रकार के बेसिक मॉडल और 10 तरह के डिजाइन स्वीकृत हैं। जिसका विवरण योजना के दिशानिर्देशों में उपलब्ध है। सभी स्वीकृत डिज़ाइन देश भर में वित्तीय अनुदान और अन्य सुविधाओं के लिए समान रूप से पात्र हैं।  

5. विभिन्न रूपों में ऊर्जा के रूप में बायोगैस के विकास और उपयोग के लिए भारत सरकार, एमएनआरई, ने निरंतर उच्च प्राथमिकता दी हुई है। राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम (एनबीएमएमपी) के अंतर्गत, 2017-18 तक पारिवारिक आकार के लगभग 50.0 लाख (5 मिलियन) संयंत्र स्थापित किए गए हैं। एनबीएमएमपी योजना को नए सिरे से डिजाइन किया गया, संशोधित किया गया और नवीन राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद कार्यक्रम (एनएनबीओएमपी) के रूप में नया नाम दिया गया है और 1 से 25 मी3 क्षमता वाले छोटे बायोगैस संयंत्रों से बायोगैस उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से 2018-19 से जारी रखा गया है। उपरोक्त क्षमता सीमा में कुल लगभग 8 लाख घन मीटर प्रतिदिन क्षमता वाली बायोगैस संयंत्र की लगभग 2.5 लाख इकाइयाँ स्थापित करना इस योजना का लक्ष्य है। भारत सरकार, एनएनआरई, ने विभिन्न स्वीकृत घटकों के लिए सीएफए भी बढ़ाया है। अब अपेक्षाकृत छोटी क्षमता श्रेणियों में 100% बायोगैस इंजन उपलब्ध हैं, और किसी बायोगैस संयंत्र से अतिरिक्त बायोगैस को प्रकाश, लघुशक्ति और बिजली की आवश्यकता पूरी करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

किसानों को पोषक तत्वों से समृद्ध जैविक जैव खाद का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, बायोगैस संयंत्र से निकलने वाले घोल को वर्मीकम्पोस्टिंग, फॉस्फेट समृद्ध कार्बनिक खाद (पीआरओएम) संयंत्रों और अन्य जैविक संवर्धन सुविधाओं से जोड़ते हुए अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में मूल्य संवर्धन करना और किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों पर व्यय में बचत कराना इस योजना का उद्देश्य है।    

 

6. एनपीबीडी/एनबीएमएमपी और एनएनबीओएमपी के अंतर्गत 1981-82 से 2018-19 तक परिवार/छोटे आकार के बायोगैस संयंत्रों के लिए संभावित क्षमता और उपलब्धि।

12.3 मिलियन बायोगैस संयंत्रों की प्रारंभिक अनुमानित संभावित क्षमता के आधार पर, बायोगैस विकास की राष्ट्रीय परियोजना (एनपीबीडी), राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम (एनबीएमएमपी) और नवीन राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद कार्यक्रम (एनएनबीओएमपी) के अंतर्गत 2018-19 तक देश में कुल 50.28 लाख परिवार/छोटे आकार के बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार अनुमानित संभावित क्षमता और उक्त 3 राष्ट्रीय कार्यक्रम बायोगैस प्रौद्योगिकी प्रसार के अंतर्गत स्थापित पारिवारिक आकार/छोटे बायोगैस संयंत्रों की कुल संख्या नीचे तालिका-1 में दिए गए अनुसार है-

 तालिका-1

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार एनपीबीडी, राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम (एनबीएमएमपी) और नवीन राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक खाद कार्यक्रम (एनएनबीओएमपी) के अंतर्गत 2018-19 तक पारिवारिक प्रकार/छोटे बायोगैस संयंत्रों के लिए अनुमानित संभावित क्षमता और क्रमसंचयी उपलब्धियां।

 

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

अनुमानित

संभावित क्षमता

(बायोगैस संयंत्रों की सं.)

क्रमसंचयी उपलब्धि 2018-19 तक*

(31/03/2019)

(बायोगैस संयंत्रों की सं.)

1

2

3

आंध्र प्रदेश

1065000

555294

अरुणाचल प्रदेश

7500

3591

असम

307000

138423

बिहार

733000

129905

छत्तीसगढ़

400000

58908

गोवा

8000

4226

गुजरात

554000

434995

हरियाणा

300000

62825

हिमाचल प्रदेश

125000

47680

जम्मू और कश्मीर

128000

3195

झारखंड

100000

7823

कर्नाटक

680000

503935

केरल

150000

152019

मध्य प्रदेश

1491000

373037

महाराष्ट्र

897000

918201

मणिपुर

38000

2128

मेघालय

24000

10659

मिजोरम

5000

5838

नागालैंड

6700

7953

ओडिशा

605000

271656

पंजाब

411000

183835

राजस्थान

915000

72132

सिक्किम

7300

9044

तमिलनाडु

615000

223618

तेलंगाना

-

19694

त्रिपुरा

28000

3688

उत्तर प्रदेश

1938000

440385

उत्तराखंड

83000

363615

पश्चिम बंगाल

695000

972

अंडमान निकोबार द्वीप

2200

97

चंडीगढ़

1400

169

दादरा और नगर हवेली

2000

681

दमन और दीव

-

0

लक्षद्वीप

-

0

दिल्ली/नई दिल्ली

12900

578

पुडुचेरी

4300

17541

केवीआईसी मुंबई

-

0

योग:

12339300

50,28,340*

* कुछ राज्यों के आंकड़े, अंकेक्षित आंकड़ों की प्राप्ति के बाद तैयार किए जाएंगे।    


7. बायोगैस आधारित बिजली उत्पादन (ऑफ-ग्रिड) और तापीय अनुप्रयोग कार्यक्रम (बीपीजीटीपी)

 हमारे देश में बायोगैस संयंत्र तापन (हीटिंग), खाना पकाने के अलावा बिजली उत्पादन/शक्ति उत्पादन और तापीय ऊर्जा अनुप्रयोग विकल्प के लिए विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत हैं। बिजली उत्पादन के इस विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (डीआरईएस) को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से छोटी क्षमता सीमा (3 केडब्ल्यू से 250 केडब्ल्यू) में और बायोडिग्रेडेबल (जैवअपघटनीय) जैविक अपशिष्ट(टों) की आवश्यक मात्रा की उपलब्धता के आधार पर संचालित 30 मी3 के 2500 मी3 आकार के बायोगैस संयंत्रों से उत्पादित बायोगैस से हीटिंग/कूलिंग के लिए तापीय ऊर्जा पर जोर दिया गया है।

विभिन्न स्रोतों जैसे कि गोबर/पशु अपशिष्ट, खाद्य और रसोई अपशिष्ट, पोल्ट्री बीट अपशिष्ट, कृषि-उद्योग अपशिष्ट आदि से जैविक जैव-अपघटनीय अपशिष्ट, बायोगैस संयंत्रों के लिए फीड स्टॉक होते हैं। व्यक्तिगत डेयरी और पोल्ट्री संयंत्रों की ऑफ-ग्रिड बिजली आवश्यकताओं, डेयरी उपकरणों के संचालन के लिए डेयरी सहकारी समितियों और संयंत्र संचालन के लिए अन्य बिजली, तापीय और शीतलन ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ये संयंत्र विशेष रूप से फायदेमंद हैं। इस प्रकार की बायोगैस प्रणालियों की स्थापना डीजी सेटों में डीजल को प्रतिस्थापित करती है और व्यक्तिगत किसानों/लाभार्थियों, उद्यमियों, डेयरी संचालकों, डेयरी सहकारी समितियों के बिजली बिल कम करती है, जिससे किसानों/अंतिम उपयोक्ताओं की आय बढ़ाने में सहायता मिलती है। पोषक तत्वों से समृद्ध कार्बनिक जैविक खाद, बायोगैस परियोजनाओं से आय सृजन का एक अन्य उपाय है और इसके साथ ही इससे रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी से रासायनिक उर्वरकों के खर्च में बचत होती है और जैविक खेती जैसे अन्य लाभदायक उपक्रम भी किए जा सकते हैं। 

7.2 बीपीपी/बीपीजीटीपी कार्यक्रमों के अंतर्गत अब तक की उपलब्धियां: 

इस कार्यक्रम को सामुदायिक/संस्थागत बायोगैस संयंत्रों पर सफलतापूर्वक लागू करने के बाद नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने, बिजली उत्पादन के लिए मध्यम आकार के बायोगैस संयंत्रों की स्थापना और/या विभिन्न तापीय और शीतलन अनुप्रयोगों के लिए बायोगैस के उपयोग की दिशा में ध्यान दिया। बायोगैस आधारित बिजली उत्पादन (ऑफ-ग्रिड) के लिए एक योजना 2006-07 में डिजाइन और प्रारंभ की गई। तब से 2018-19 (31.03.2019) तक कुल 389 बिजली परियोजनाओं को चालू किया गया है।

बायोगैस आधारित बिजली उत्पादन (ऑफ-ग्रिड) के अंतर्गत राज्यवार क्रमसंचयी उपलब्धियां 2018-19 तक (31.03.2019 तक के अनुसार अंतिमीकृत)

क्रम सं.

राज्य का नाम

संस्थापित

 

 

संख्या

मी3

केडब्ल्यू (किलोवाट)

1

आंध्र प्रदेश

34

4320

481

2

गुजरात

2

285

30

3

हरियाणा

3

2540

155

4

कर्नाटक

70

15670

1581.5

5

महाराष्ट्र

68

11690

1257.5

6

पंजाब

41

9980

1035

7

राजस्थान

2

120

15

8

तमिलनाडु

52

30360

2853.5

9

उत्तराखंड

17

1070

124

10

उत्तर प्रदेश

30

4400

591

11

मध्य प्रदेश

6

735

70

12

केरल

36

1010

118

13

पश्चिम बंगाल

1

340

60

14

ओडिशा

2

60

10

15

तेलंगाना

25

5410

574

 

 

389

87990

8951.5

 

7.3 योजना के अंतर्गत स्थापित बायोगैस संयंत्र लाभार्थियों और डेयरी किसानों और अन्य संगठनों की बिजली या तापीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इसे दूध ठंडा करने के अनुप्रयोगों और अन्य सामान्य अनुप्रयोगों जैसे पम्पिंग, प्रकाश व्यवस्था, सिंचाई के अलावा खाना पकाने के लिए उपयोग किया जाता है। ऑफ-ग्रिड मोड में किसान अपनी अतिरिक्त बायोगैस/बिजली अपने पड़ोसियों को बेच भी सकते हैं।

बायोगैस बिजली संयंत्रों का प्रभाव:

तीसरे पक्ष द्वारा अध्ययन के माध्यम से सूचित किए गए आंकड़ों और मूल्यांकन के आधार पर, कार्यक्रम क्रियान्वयन का कुल प्रभाव उत्साहजनक पाया गया। जैसा कि 45 बायोगैस संयंत्रों के केस अध्ययन और 163 परियोजनाओं के लिए बहिर्वेशित हेतु नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट होता हैः

मापदंड मान*

संयंत्रों की कुल संख्या

163

वार्षिक ऊर्जा लागत बचत (लाख रु. में)

787

वार्षिक CO2 बचत (टन में)

9587

वार्षिक जैविक खाद उत्पादन (टन में)

32582

प्रत्यक्ष रोजगार (मानव दिवस)

63438

परोक्ष रोजगार (मानव दिवस)

56894

 

7.4. बीपीजीटीपी का क्रियान्वयन:

बीपीजीटीपी योजना राज्यों के कृषि और ग्रामीण विकास विभागों और डेयरी सहकारी समितियों द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। हालांकि, यह कार्यक्रम राज्यों की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसियों (एसएनए), बायोगैस डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर्स (बीडीटीसी), खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से भी उन राज्यों में लागू किया जाता है - जहां कृषि और राज्य ग्रामीण विकास विभाग इसे लागू करने की स्थिति में नहीं हैं। सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आवश्यकता आधारित हस्तक्षेप अनुमत करते हुए कार्यक्रम क्रियान्वयन एजेंसियां ​​(पीआईए) आदिवासी क्षेत्रों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों, वनों के किनारे बसे गांवों जहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों की बड़ी जनसंख्या है, को कवर करने के लिए अतिव्यापी संस्थान के रूप में पंचायती राज संस्थानों/स्थानीय निकायों (एलबी) की मदद ले सकती हैं। 

2019
2018
2017
2016