HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT

HRD Policy of the Ministry

परियोजना नियोजन, सिस्टम डिजाइन, उत्पाद विकास, प्रचालन, और स्थापित प्रणालियों के अनुरक्षण और मरम्मत के लिए, देश में और देश के बाहर एक से दो सप्ताह की छोटी अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के प्रावधानों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा प्रशिक्षण और अध्ययन दौरों के लिए एक योजना लागू करते हुए, मंत्रालय में पहली बार 1999-2000 में एक व्यवस्थित कार्मिकशक्ति विकास प्रयास शुरू किया गया। 1999 - 2000 के दौरान एक राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा फेलोशिप योजना भी शुरू की गई। इन योजनाओं को 2019-20 तक उसी प्रारूप में जारी रखा जाएगा। वर्ष 2017-18 के दौरान, मंत्रालय के कार्यक्रमों के उन्नयन/पुनर्स्थापन को दृष्टिगत रखते हुए अधिक कार्मिकशक्ति की आवश्यकता पूरी करने के लिए इन योजनाओं को निम्न प्रावधानों के साथ फिर से तैयार किया गया:

(a) मंत्रालय और इसके सम्बद्ध कार्यालयों और भारत और विदेशों में विशेष संस्थानों में स्वायत्त निकायों में काम करने वाले पेशेवरों को प्रशिक्षण;

(b) राज्य नोडल एजेंसी/सरकार/उपयोगिता सेवाओं में काम करने वाले पेशेवरों को प्रौद्योगिकी, इसके विकास और परियोजना प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षण;

(c) कार्मिकशक्ति को सामाजिक/आर्थिक, व्यापार, कानूनी व्यापार, आईपीआर, प्रशासन, प्रबंधकीय और पर्यावरणीय पहलुओं के बारे में प्रशिक्षण;

(d) अनुसंधान और विकास संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों, सामुदायिक संगठनों, बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं आदि में नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे कार्मिकों का प्रशिक्षण।

(e) i. प्रशिक्षण-सह-अध्ययन भ्रमण का आयोजन;

ii.  विशेषज्ञ (विशेषज्ञों)/विशेषज्ञ संस्थान (संस्थानों) के माध्यम से शिक्षण सहित प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास;

iii. दीर्घकालीन एचआरडी आवश्यकताओं के समाधान: नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में छात्रों और पेशेवरों को प्रोत्साहित करने के लिए, और विश्वविद्यालयों/तकनीकी संस्थानों के माध्यम से कार्मिकों को नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं पर काम करने के लिए तैयार करने के लिए, निम्न को भी योजना में शामिल किया गया हैः

a) नवीकरणीय ऊर्जा के सभी पहलुओं पर अनुसंधान आयोजित किए जाने के लिए, अधिक संख्या में विश्वविद्यालयों/संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) संस्थानों को कवर करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा फेलोशिप योजना की कवरेज बढ़ाना। इस तरह आर एंड डी कार्यक्रम केवल कुछ प्रौद्योगिकी संस्थानों तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि पूरे देश में इसका व्यापक प्रसार होगा;

b) नवीकरणीय ऊर्जा को कवर करने के लिए तकनीकी संस्थानों की पाठ्यक्रम संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए, आईटीआई, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम में समावेशित करने हेतु मॉडल पाठ्यक्रम तत्काल विकसित करने की आवश्यकता है। इस प्रकार विकसित पाठ्यक्रम और कोर्स सामग्री को ऐसे सभी संस्थानों में राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड और एआईसीटीई के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा।

जहां पुनर्गठित योजना, कार्मिकशक्ति संबंधी अल्पकालिक आवश्यकता की पूर्ति कर रही है, वहीं देश में नवीकरणीय ऊर्जा विकास के लिए व्यवस्थित और दीर्घकालिक कार्मिकशक्ति आवश्यकता की पूर्ति के लिए [1] जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनएपीसीसी) और विद्युत अधिनियम, 2003 के नवीकरणीय खरीद दायित्व (आरपीओ) के साथ सम्बद्ध राष्ट्रीय सोलर मिशन, नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) प्रणाली और हाल ही में घोषित 175 जीडब्ल्यू नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत उत्पादन के स्वरूप में सरकार के द्वारा की गई पहल को देखते हुए इन संस्थानों द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों में एक संस्थागत ढांचा विकसित किया जाना आवश्यक पाया गया। इसलिए एचआरडी योजना में निम्नानुसार नए प्रावधान जोड़े गए (एचआरडी योजना का परिशिष्ट/संशोधन। जेआरएफ/एसआरएफ/आरए की फेलोशिप का पुनरीक्षण दिनांकित (7-6-2019), एम.टेक/एम.ई. विद्यार्थियों की फेलोशिप का पुनरीक्षणजेआरएफ और एसआरएफ अध्येताओं की फेलोशिप का पुनरीक्षण:

i. 400 छात्रों/शोधकर्ताओं को फेलोशिप प्रदान करने के लिए मौजूदा राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा फेलोशिप योजना में वृद्धि करना।

400 फेलोशिप इस प्रकार वितरित की जाएगी:

कोर्स

अवधि

प्रति वर्ष अंतर्ग्रहण

फेलोशिप 1वर्ष

2  वर्ष

3  वर्ष (बाद के वर्षों के लिए स्थिर संख्या)

एम.टेक

2 वर्ष

200

200

400

400

एम.एससी

2 वर्ष

100

100

200

200

जेआरएफ

2 वर्ष

40

40

80

280*

एसआरएफ

3 वर्ष

40

40

80

120

आरए/पीडीएफ

3 वर्ष

20

20

40

60

योग

400

400

800

1060

·         *इसमें जेआरएफ में सम्मिलित होने वाले 200 एकीकृत एम.एससी विद्यार्थी सम्मिलित हैं।

 जहां जेआरएफ/एसआरएफ/आरए/पीडीएफ ऐसे सभी विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के लिए खुला होगा जिनके पास मंत्रालय के आर एंड डी कार्यक्रम के चिन्हित महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए सुविधाएं हैं, वहीं एम.टेक और एकीकृत एम.एससी का क्रियान्वयन नवीकरणीय ऊर्जा की किसी भी शाखा में विशेषज्ञता के साथ ऊर्जा अध्ययन/नवीकरणीय ऊर्जा में एम.टेक./एकीकृत एम.एससी पाठ्यक्रम वाले शैक्षिक संस्थानों में किया जाएगा। ऐखुली विज्ञापन पद्धति द्वारा ऐसे 20 संस्थानों का चयन प्रति संस्थान 15 सीटों के अनुसार किया जाएगा। बाकी फेलोशिप के लिए चयन, खुले विज्ञापन और प्राप्त आवेदनों के विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा।

 अभ्यर्थियों की सूची जिन्हें एनआरईएफ प्रदान की गई है

राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा फेलो (एनआरईएफ) द्वारा प्रकाशन

ढांचागत सुविधाएं जैसे कि प्रयोगशाला और अन्य शिक्षण सहायक सामग्री स्थापित करने के लिए शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।

नवीकरणीय ऊर्जा शैक्षिक कार्यक्रम संचालन के लिए शैक्षणिक संस्थानों को मौजूदा प्रयोगशाला सुविधाओं के उन्नयन के लिए 50,00,000/- (रुपये केवल पचास लाख) प्रति संस्थान एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। प्रत्येक वर्ष अधिकतम पांच संस्थानों को इस तरह का अनुदान प्रदान किया जाएगा। ऐसे संस्थानों का चयन या तो खुले विज्ञापन के माध्यम से किया जाएगा या एम.टेक/एकीकृत एम.एससी. फेलोशिप के लिए पांच मान्यता प्राप्त संस्थानों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा, श्रम मंत्रालय के उन्नत प्रशिक्षण संस्थानों को भी उनके संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रशिक्षकों की प्रशिक्षण सुविधा के उन्नयन के लिए अनुदान दिया जाएगा। संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। 

iv. छात्रवृत्ति योजनाओं को स्थापित करके नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत एम.एससी. और पीएच.डी कार्यक्रम  शुरू करने के लिए।

विज्ञान के प्रतिभासंपन्न छात्रों को स्नातकोत्तर स्तर में एक विषय के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा लेने के लिए प्रोत्साहित करने और उसके बाद नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय अनुसंधान (मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त आरएंडडी दोनों) के लिए, स्नातकोत्तर स्तर पर मंत्रालय चयनित छात्रों को पीजी की पढ़ाई के दौरान रु. 4000/- (रुपये चार हजार केवल) प्रतिमाह छात्रवृत्ति योजना को लागू कर सकता है और उसके बाद उन्हें अधिकतम पांच वर्षों की अवधि के लिए एनआरईएफ प्रदान किया जाता है। हर वर्ष ऐसी 100 फेलोशिप, दस मान्यता प्राप्त संस्थानों में दी जा सकती हैं।  मंत्रालय द्वारा एक मॉडल कोर्स पाठ्यक्रम   तैयार किया गया है। जिसे शिक्षण संस्थानों द्वारा उपयोग किया जा सकता है।

v. शैक्षिक और अन्य संस्थाओं को नियमित आधार पर अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाने के लिए मंत्रालय, पैनल में शामिल करेगा। जहां इनमें से कुछ अल्पावधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, योजना के प्रावधानों के अनुसार मंत्रालय द्वारा समर्थित होंगे, वहीं नवीकरणीय ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं पर स्व वित्तपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए भी संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

सूर्यमित्र कार्यक्रम

 

एसपीवी प्रणाली को स्थापित करने, संचालित करने और अनुरक्षित करने के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों की भारी मांग को देखते हुए, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कुशल कार्मिकशक्ति तैयार करने के लिए, मंत्रालय ने 2015 में राष्ट्रीय सोलर मिशन के अंतर्गत सूर्यमित्र कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किया और देश में 2019-2020 तक 50,000 सूर्यमित्र तैयार करने के लक्ष्य के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाओं में नियोजन के लिए कुशल कार्मिकशक्ति तैयार करने के लिए राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) को प्रशिक्षण समन्वय का कार्य सौंपा गया। यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के मानदंडों का पालन करता है। 31  मार्च, 2019 तक के अनुसार, अब तक 31,092 सूर्यमित्रों को प्रशिक्षित किया गया है।

 

सोलर पीवी उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुशल और रोजगारपरक कार्मिकशक्ति (सूर्यमित्र) विकसित करना सूर्यमित्र कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य है। सूर्यमित्र कौशल विकास कार्यक्रम की अवधि तीन महीने की है जिसमें 600 घंटे शामिल हैं और जिसमें कक्षा प्रशिक्षण, प्रयोगशाला में प्रयोग अभ्यास, एसपीवी संयंत्र का भ्रमण, ऑन द जॉब प्रशिक्षण (ओजेटी), सॉफ्ट स्किल और उद्यमिता कौशल सम्मिलित हैं। न्यूनतम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण + इलेक्ट्रीशियन/वायरमैन/इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक/फिटर/शीट मेटल में आईटीआई। प्रत्येक बैच में लगभग 30 सीटें हैं। सूर्यमित्र कार्यक्रम के समापन पर, आयोजक संस्थान प्रशिक्षुओं को नियुक्ति सुविधा प्रदान करता है।



 सूर्यमित्र प्रशिक्षण केंद्र वित्त वर्ष 2019-20

 

प्रतिभागियों सूची

·          वर्ष 2015-16 के लिए

 वर्ष 2016-17 के लिए

 वर्ष 2017-18 के लिए

 वर्ष 2018-19 के लिए

      बेयरफुट कॉलेज, राजस्थान द्वारा प्रशिक्षित प्रतिभागियों की सूची

·         वर्ष 2015-16 के लिए

·         वर्ष 2016-17 के लिए

·         वर्ष 2017-18 के लिए

·         वर्ष 2018-19 के लिए

  

·         2015-16 और 2016-17 के दौरान (महात्मा गांधी ग्रामीण ऊर्जा और विकास संस्थान, बेंगलुरु कर्नाटक द्वारा)  प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची

·  2014-15 के दौरान  (गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय, गांधीग्राम, तमिलनाडु द्वारा) प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची 

·  2014-15 के दौरान  (लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड कांस्ट्रक्शन द्वारा) प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची 

·   2012-14 के दौरान  (केपीसीएल, बैंगलोर द्वारा) प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची

·  2013-14 के दौरान  (एनआईईएसबीयूडी द्वारा) प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची 

·  2014 के दौरान  (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा) प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची

·  2014-15 के दौरान विभिन्न अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची

·  2012-13 के दौरान विभिन्न अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची

·  2010-12 के दौरान विभिन्न अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित व्यक्तियों की सूची   

  

इसके अलावा, मंत्रालय ने कुछ निश्चित विषयों जैसे कि इलेक्ट्रीशियन, फिटर, टर्नर, वेल्डर, प्लंबर आदि के आईटीआई छात्रों के नियमित पाठ्यक्रम में सोलर लाइटिंग, सोलर तापीय और लघु जलविद्युत को सम्मिलित करने का मुद्दा उठाया था। पाठ्यक्रम सामग्री तैयार की गई और रोजगार और प्रशिक्षण महानिदेशालय को सौंपी गई और इसे आईटीआई के विषयों की पाठ्‌यसामग्री में सम्मिलित किया गया है ताकि नियमित दो वर्षीय आईटीआई पाठ्यक्रम के दौरान लगभग 16-60 घंटे नवीकरणीय ऊर्जा कौशल विकास हेतु दिए जा सकें। डीजीईटी अपने शिल्पकार प्रशिक्षण कार्यक्रम (सीटीएस) और मॉड्यूलर रोजगार कौशल विकास कार्यक्रम (एमईएस) के अंतर्गत कौशल विकास के विशिष्ट कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसमें वे 60-960 घंटे की अवधि का विशेष प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इन पाठ्यक्रमों के लिए मंत्रालय तकनीकी इनपुट के साथ-साथ मूल्यांकनकर्ता भी उपलब्ध कराएगा।

 इन प्रयासों के अलावा, मंत्रालय ने राष्ट्रीय नवीकरणीय सोलर विज्ञान अध्येता कार्यक्रम  के नाम से 12वीं योजना अवधि में एक विशेष फेलोशिप योजना शुरू की है जो सौर ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए है और “ राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा विज्ञान फेलो कार्यक्रम  [21]” के अंतर्गत अवधि हेतु इसे नवीकरणीय ऊर्जा के सभी क्षेत्रों तक बढ़ाया गया है, जिसके अंतर्गत 10 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को रु. 12 लाख प्रतिवर्ष की फेलोशिप, रु. 5 लाख प्रतिवर्ष आकस्मिक अनुदान और रु. 15 लाख प्रतिवर्ष शोध अनुदान प्रदान किया जाएगा।

              

दस्तावेज:

1.    शीर्षक: 2017-18 से 2019-2020 की अवधि के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में मानव संसाधन विकास कार्यक्रम जारी रखने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति

विवरण: राष्ट्रीय सोलर विज्ञान फेलोशिप का दायरा समस्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तक बढ़ा दिया गया है और अतएव इसे अब राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा विज्ञान फेलोशिप कार्यक्रम के रूप में जाना जाएगा

2.    शीर्षक: राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा फेलोशिप सूची

3.    शीर्षक: वर्ष 2010-14 के दौरान राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा फेलोज द्वारा प्रकाशनों का सारांश

4.    शीर्षक: एनआरईएफ सूची 2011-अब तक

दस्तावेज

Scope of National Solar Science fellowship has been extended to entire Renewable Energy area and therefore will be known as National Renewable Energy Science Fellowship Programme

राष्ट्रीय सोलर विज्ञान फेलोशिप का दायरा समस्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तक बढ़ा दिया गया है और अतएव इसे अब राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा विज्ञान फेलोशिप कार्यक्रम के रूप में जाना जाएगा