मानव जाति के लिए अक्षय भविष्य
चुनौतियां और संभाव्यताएं
डॉ. फारुक़ अब्दुल्ला
मंत्री
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा
भारत
एशियन डेवलपमेंट बैंक के पांचवें एशियाई स्वच्छ
ऊर्जा फोरम में दिया गया भाषण
23 जून 2010
देवियो और सज्जनो,
यह अत्यंत हर्ष और गौरव का अवसर है कि मुझे पांचवें एशियाई स्वच्छ ऊर्जा फोरम के अवसर पर एशिया में स्वच्छ ऊर्जा विषय पर संबोधित करने का आमंत्रण दिया गया है। इस सम्मेलन का समय अत्यंत प्रशंसनीय है। मौसम परिवर्तन तथा ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं के संदर्भ में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र पर फोकस लगातार बढ़ रहा है। मैं एशियाई विकास बैंक और इसका समर्थन करने वाले प्रायोजकों को बधाई देता हूं तथा इस प्रयास के लिए प्रशंसा करता हूं। मैं इस महत्वपूर्ण आयोजन में आमंत्रित करने के लिए आयोजकों को धन्यवाद देना चाहता हूं।
मैं एक ऐसे देश से हूं जिसे विकासशील कहा जाता है, किन्तु यह एक ऐसी गति पर विकासशील है जो अन्य अनेक देशों के साथ तुलना योग्य नहीं है। हमारी आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण तरक्की हुई है। परन्तु यह तथ्य बना हुआ है कि यह वृद्धि ऊर्जा आपूर्ति और उपलब्धता के कारण सीमित है। जब स्वतंत्रता के शुरूआती दशकों में वृद्धि दर कम थी, तब ऊर्जा की समस्या को केवल अल्पावधि अदक्षता तथा आपूर्ति बाधाओं के साथ सुप्त रूप में देखा गया था। परन्तु हाल के वर्षों में आगे बढ़ी ऊर्जा की आवश्यकता कोयले तथा तेल जैसे तेजी से समाप्त होते पारंपरिक स्रोतों के कारण जटिल हो गई है। हाइड्रो कार्बन आधारित वृद्धि के बारे में अनेक सवाल है, खास तौर पर ये गंभीर पर्यावरण संबंधी मुद्दों के संदर्भ में हैं। हमारी ऊर्जा कमी को पूरा करने के प्रयास में हम स्वच्छ, स्थायी, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं। चाहे अक्षय ऊर्जा के साधन पूरी तरह जीवाश्म ईंधनों का स्थान न ले सकें, फिर भी हम अक्षय ऊर्जा के विकास के लिए दृढ़ निश्चयी हैं।
आज भारत अक्षय ऊर्जा क्षमता के संदर्भों में दुनिया के पांच सर्वोच्च देशों में से एक है। हमने 15 गीगावॉट से अधिक का आधार स्थापित किया है, जो भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का लगभग 9 प्रतिशत है और विद्युत सम्मिश्र में इसका योगदान 3 प्रतिशत से अधिक है। भारतीय संदर्भ में अक्षय ऊर्जा पर्यावरण स्थायित्व तथा ऊर्जा सुरक्षा के दोहरे परिप्रेक्ष्य से महत्वपूर्ण है और इसकी सबसे अधिक सकारात्मक विशेषता इसका विकेन्द्रित प्रकार होना है। अपने विकेन्द्रित, वितरित रूप में यह हजारों दूरस्थ तथा पर्वतीय गांवों एवं कस्बों में विद्युत का सबसे अधिक उपयुक्त, आरोह्य और अनुकूल सामाधान है। यहां तक कि आज भी हजारों विकेन्द्रित ऊर्जा प्रणालियां, सौर लाइटिंग प्रणालियां, सिंचाई पंप, एयरोजनरेटर, बायो गैस संयंत्र, सौर कुकर, बायोमास गैसीफायर, उन्नत चूल्हे देश के दूरस्थ, अनभिगम्य कोनों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। समाज के सबसे अधिक वंचित और दूर दराज में रहने वाले समुदायों को ऊर्जा तक पहुंच प्रदान करते हुए यह समावेशी वृद्धि का सबसे बड़ा प्रेरक है।
भारत के विशाल भौगोलिक क्षेत्र में यात्रा करते हुए मैंने स्वयं देखा है कि छोटे स्टैंड एलोन ऑफ ग्रिड या वितरित तंत्र किस प्रकार लाखों गरीबों के जीवन में अंतर ले आते हैं। मेरे अपने राज्य, जम्मू और कश्मीर में स्थित एक दूरदराज के गांव गुरेज में जो सीमा पर है, मैंने स्वयं देखा है कि एक मूलभूत घरेलू लाइटिंग प्रणाली लोगों के जीवन में किस तरह बदलाव ला सकती है। उत्तराखण्ड में हाल के दौरे में मुझे मुख्य मंत्री ने बताया कि पर्वतीय और सीमावर्ती गांवों में सौर लालटेन लोगों की मूलभूत ऊर्जा पहुंच किस प्रकार बढ़ाती है जो अन्यथा ऊर्जा से वंचित रह जाते हैं। दूरदराज के इलाकों और खानाबदोश आबादियों के बीच केवल सौर लालटेन बांट कर हम 10 लाख घरों को रोशन कर सकते हैं। इसी प्रकार 10 लाख स्ट्रीट लाइट एक लाख से अधिक गांव में सड़कों पर रोशनी उपलब्ध करा सकती हैं। पुन:, इन सभी प्रयासों से हजारों नौकरियां पैदा होंगी और स्थानीय तथा ग्राम स्तरों पर स्वयं रोजगार के अवसर बनेंगे।
हम अक्षय स्रोतों के माध्यम से विकेन्द्रित ऊर्जा के अनेक नए अनुप्रयोगों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। मेरे मंत्रालय ने हाल ही में राजस्थान को 9,168 पंचायत केन्द्रों में 1.12 किलोवॉट क्षमता की सौर प्रणालियों की स्थापना द्वारा राज्य में प्रत्येक स्थानीय स्वयं निकाय को सौर विद्युत प्रदान करने की एक परियोजना संस्वीकृत की है। इन प्रणालियों से कम्प्यूटर, टेलीविजन चलाने के लिए भरोसेमंद विद्युत प्रदान करने में सहायता मिलेगी और ये अन्यथा दूरदराज के निर्धन इलाकों में संयोजकता प्रदान करेंगी। मध्य प्रदेश राज्य की एक अन्य परियोजना में हम घने जंगलों वाले इलाकों में दूरदराज के कस्बों में सौर विद्युत से रोशनी प्रदान कर रहे हैं। हम संरक्षण, शिक्षा और ग्रामीण विकास के प्रयासों में संकेन्द्रण लाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण बिहार में हमारे पास स्थानीय रूप से उपलब्ध चावल की भूसी के इस्तेमाल से बिजली के उत्पादन की एक परियोजना है। तमिलनाडु के नम्मकल में स्थानीय रूप से उपलब्ध मुर्गियों के अपशिष्ट का उपयोग करते हुए बिजली का उत्पादन किया जा रहा है जो अन्यथा एक व्यर्थ पदार्थ है। इनमें से प्रत्येक प्रयास निर्धनतम और सबसे दूरदराज के इलाकों तक ऊर्जा की पहुंच बनाने के लिए किया गया है। हमारी सरकार का विश्वास है कि केवल यही एक सबसे सशक्त प्रेरणा है जो अक्षय ऊर्जा को लगातार आगे बढ़ा सकती है। इस संदर्भ में मुझे यह जानकर खुशी है कि एशियाई डेवलपमेंट बैंक की 2009 की नीति में भी ऊर्जा तक सार्वत्रिक पहुंच प्रदान करने के लिए अक्षय ऊर्जा को समर्थन प्रदान किया गया है। मैं भारत में इस रूपांतरण प्रयास में सहयोग देने के लिए एशियाई डेवलपमेंट बैंक को आमंत्रण देता हूं।
अक्षय ऊर्जा का वितरित उपयोग हमारी कार्यसूची में है, फिर भी हम इस बात से अवगत नहीं है कि अक्षय ऊर्जा उत्पादन और ग्रिड में विद्युत फीड करने की अपार संभाव्यता कितनी है। नवम्बर 2009 में भारत सरकार में जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (जेएनएनएसएम) अनुमोदित किया है। यह एक विशिष्ट और महत्वाकांक्षी रूपांतरकारी उद्देश्य है जिसका लक्ष्य भारत को सौर ऊर्जा में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करना है। मिशन का लक्ष्य 2022 तक भारत में लगाई जाने वाली 20,000 मेगावॉट सौर विद्युत को सक्षम बनाना है। इसका लक्ष्य 2013 तक 1000 मेगावॉट ग्रिड संबद्ध बिजली के उत्पादन की सुविधा प्रदान करना भी है। यह दुनिया में किसी भी स्थान पर किया गया सबसे बड़ा और सबसे अधिक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है।
जबकि सौर ऊर्जा भविष्य है, पवन ऊर्जा एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत वर्तमान परिदृश्य में निर्माण और उपयोगिता में वैश्विक प्रतिस्पर्द्धी है। भारत ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में 11000 मेगावॉट से अधिक की क्षमता स्थापित की है और यह दुनिया में अमेरिका, जर्मनी, चीन और स्पेन के बाद पांचवें स्थान तक है। पवन ऊर्जा उत्पादन में हमारी नीति रूपरेखा निवेश के लिए अनुकूल है और एक आकर्षक प्रशुल्क तथा विनियामक व्यवस्था इस क्षेत्र की वृद्धि को एक सशक्त आधार प्रदान करती है। वास्तव में मेरे मंत्रालय द्वारा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के जरिए विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देने संबंधी हाल के निर्णय से विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच प्रतिस्पर्द्धा का एक अच्छा स्तर बनेगा। मुझे आशा है कि इससे स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों और विदेशी निवेशकों द्वारा अधिक से अधिक निवेशों को उत्प्रेरित किया जा सकेगा।
बायोमास विद्युत उत्पादन के लिए एक पर्यावरण अनुकूल स्रोत है जिसमें भारत के लिए आशाएं छुपी हुई हैं। हमारे अनुमान से संकेत मिलता है कि फसल अवशेषों के वर्तमान उपयोगिता पैटर्न के साथ अधिशेष बायोमास सामग्री की मात्रा लगभग 150 मिलियन टन है, जिससे लगभग 16000 मेगावॉट विद्युत का उत्पादन हो सकता है।
हाइड्रो परियोजनाओं में 25 मेगावॉट तक कि क्षमता को लघुपन बिजली कहा जाता है और ऊर्जा की इस धारा में 15,000 मेगावॉट से अधिक की संभाव्यता है। वर्तमान में लगभग 300 मेगावॉट प्रतिवर्ष का क्षमता वर्धन लघु पनबिजली परियोजनाओं से अर्जित किया जा रहा है - जो निजी क्षेत्र के माध्यम से लगभग 70 प्रतिशत है। अब तक 2700 मेगावॉट पनबिजली परियोजनाएं देश में स्थापित की गई हैं और लगभग 900 मेगावॉट कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों पर हैं। इसका लक्ष्य वर्तमान वृद्धि दर को दोगुना बनाना और अगले 2-3 वर्षों में 500 मेगावॉट प्रति वर्ष का क्षमता वर्धन करना है।
हमारे सामने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आम तौर पर आने वाली चुनौती और खास तौर पर भारत के मामले में अक्षय ऊर्जा की प्रति यूनिट लागत में कमी लाने की है। अत: दक्षता को बढ़ाने के लिए निरंतर नवाचार किया जाए तथा लागतों को कम किया जाए। लागतों में कमी अनेक तरीकों से की जा सकती है – यह संभव है कि पवन की धीमी गति को इस्तेमाल किया जाए, ज्वार तथा तरंगों की ऊर्जा से बिजली उत्पन्न की जाए, वैकल्पिक परिवहन ईंधन हमारी यात्रा को कम कार्बन सघन बना सकते हैं, हाइड्रोजन एक आदर्श ऊर्जा भंडार और वाहक हो सकता है। यह संभव है कि बिजली की न्यूनतम हानि के साथ महाद्वीपों को जोड़कर ग्रिड बनाई जाए। इसी प्रकार नवाचार का एक अन्य क्षेत्र कम्प्यूटर समर्थित विद्युत नेटवर्क या स्मार्ट ग्रिड के माध्यम से परिवर्ती विद्युत उत्पादन की जटिलता का तकनीकी – प्रबंधन हो सकता है। अक्षय ऊर्जा के स्थायित्व के साथ स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन की दक्षता एक अच्छा संयोजन हो सकता है। आईटी के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ते हुए भारत को इसका एक प्राकृतिक लाभ मिल सकता है।
हम अनुसंधान का केन्द्र बिन्दु बनाने के लिए उत्कृष्टता केन्द्रों का निर्माण भी कर रहे हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली के पास स्थित सौर ऊर्जा केन्द्र देश में सौर ऊर्जा का केन्द्र बिन्दु है। हमें आशा है कि सौर विद्युत केन्द्र देश में सभी अनुसंधान और विकास कार्यकलापों के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र बन सकता है। पवन के लिए हमने पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केन्द्र (सी वैट) बनाया है जो अनुसंधान और विकास कार्यकलापों का एक उत्कृष्टता संस्थान है। हम निजी क्षेत्र के जाने माने संगठनों के साथ सुविधा और सहयोग भी कर रहे हैं ताकि नई प्रौद्योगिकियों, प्रक्रमों और सामग्रियों का उपयोग करते हुए नवाचारी समाधानों की एक व्यापक परास प्रदान की जा सके।
नीति के मोर्चे पर मेरा मंत्रालय भी व्यापार योग्य अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के लिए रूपरेखा बनाने हेतु राज्य विनियामकों के साथ कार्य करता है। जबकि इससे अक्षय ऊर्जा विकासकों के लिए बेहतर प्रशुल्क की प्रक्रिया तैयार होती है फिर भी इससे हम अपने विद्युत सम्मिश्र में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाने की सक्षमता प्राप्त करेंगे। संघीय विद्युत विनियामक ने अक्षय ऊर्जा हेतु प्रशुल्क निर्धारण के लिए अनंतिम विनियामकों के सांकेतिक दिशानिर्देश हाल ही में घोषित किए हैं। हमें आशा है कि इससे क्षेत्र में निवेशों को बढ़ावा मिलेगा हम बैंकों और उधार देने वाली एजेंसियों के साथ नजदीकी से कार्य कर रहे हैं ताकि विकासकों को आसान और सस्ते स्रोतों से निधिकरण प्राप्त हो सके। हम एशियाई विकास बैंक और अन्य बहु पार्श्वीय संस्थानों से अनुरोध करते हैं कि वे निधिकरण और जोखिम शमन के उन्नत विकल्पों के साथ आगे आएं।
शताब्दियों से भारतीय परंपरा में सूर्य, पवन, पृथ्वी की पूजा की जाती है और पानी जीवन, ऊर्जा तथा रचना का स्रोत है। यह एक विडम्बना है कि विनाश और बर्बादी की सहस्राब्दि के बाद मानव जाति आज उन्हीं तत्वों की ओर वापस लौट रही है जिनका एक समय सम्मान और पूजा की जाती थी। मेरा विश्वास है कि अब भी देर नहीं हुई है। हमारे पास सीमाहीन और स्वच्छ ऊर्जा के वचन को वास्तविकता में रूपांतरित करने के सच्चे अवसर हैं। शहरी बस्तियों में रूफ टॉप सौर विद्युत को अधिकतम मांग के समय के दौरान मेगावॉट साइज़ के ग्रिड संबद्ध विद्युत संयंत्रों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण समुदायों में छोटे विकेन्द्रित और ऑफग्रिड समाधानों तक – अक्षय ऊर्जा में अपार अवसर है। हमारा विश्वास है कि एक सुविधा प्रदानकर्ता की भूमिका में सरार को नए व्यापार मॉडलों, तकनीकी और बाजार नवचारों के साथ मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधानों को बढ़ावा देने के लिए एक समर्थनकारी परिवेश बनाने की जरूरत है। यह उद्यमियों और पणधारियों के लिए चुनौती है। मैं यह देखना चाहता हूं कि दुनिया के प्रत्येक नागरिक की पहुंच भरोसेमंद और वहनीय दर पर प्रत्येक नागरिक को मिल सके। आज की प्रौद्योगिकी हमें यह अवसर देती है। हमारे लिए जरूरी है कि हम इन अवसरों का लाभ मिलजुल कर उठाएं और संपूर्ण मानव जाति के लिए एक बेहतर दुनिया की संकल्पना को वास्तविकता में बदलें।
धन्यवाद